कानपुर / बाल दिवस पर बच्चे को स्कूल से बाहर निकाला, धरने पर बैठा परिवार, आरटीई के तहत हुआ था एडमीशन

कानपुर. यहां नर्चर इंटरनेशनल स्कूल में बाल दिवस के दिन पहली कक्षा में पढ़ने वाले एक बच्चे को स्कूल से बाहर कर दिया गया। जानकारी होने पर जब अभिभावक पहुंचे तो आरोप है कि, उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया। घटना से आहत माता-पिता फूट-फूटकर रोने लगे और स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। सूचना पाकर एबीएसए ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर धरना खत्म कराया है। बच्चे का स्कूल में राइट-टू-एजुकेशन के तहत एडमिशन हुआ था। 




ढाई घंटे धरने पर बैठे रहे बच्चे संग माता-पिता




बर्रा थाना क्षेत्र स्थित बर्रा दो निवासी राजेश मिश्रा प्राईवेट नौकरी करते हैं। परिवार में पत्नी आरती मिश्रा और एकलौते बेटा वैभव है। राजेश मिश्रा ने बेटे वैभव का एडमीशन बर्रा के नर्चर इंटरनेशनल स्कूल में राइट-टू-एजुकेशन के तहत फर्स्ट क्लास में कराया था। 


गुरूवार सुबह राजेश बच्चे को स्कूल छोड़कर गए थे। जैसे ही वो घर पहुंचे तो उनके पास स्कूल से फोन से आया कि बच्चे को स्कूल से आकर ले जाओ। जब पैरेंट्स स्कूल पहुंचे तो देखा कि वैभव स्कूल के बाहर खड़ा था। पैरेंट्स ने स्कूल से बाहर निकाले जाने की वजह पूछने के लिए अंदर जाने की कोशिश की तो उन्हे स्कूल में प्रवेश से रोक दिया गया। इस घटना से आहत पैरेंट्स स्कूल गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए। करीब ढाई घंटे के बाद एबीएसए मौके पर पहुंचे और उन्होंने समझा बुझाकर धरना खत्म कराया। 


अभिभावकों का यह आरोप
राजेश मिश्रा ने बताया- मैने अपने बच्चे का एडमीशन राइट टू एजुकेशन के तहत कराया था। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि मैं आरटीई को नहीं मानता हूं। मेरा बच्चा दो माह से पढ़ रहा है, उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उसको क्लास में अन्य बच्चों से अलग बैठाया जाता है। बच्चे की कॉपी नहीं चेक की जाती है। पैरेंट्स मीटिंग में आते है तो कॉपी नहीं दिखाई जाती है। बल्कि, हमसे कोई टीचर बात तक नहीं करता है।


बताया- मैं तीन बार बच्चे की बुक लेने के लिए लखनऊ गया, वहां मुझसे कहा गया कि स्कूल वालों ने बुक देने से मना कर दिया है। 15 मई को लेटर लेकर आ गए थे। इसके बार तीन माह तक चक्कर लगाते रहे, इसके बाद बच्चे का दाखिला किया था। जब अधिकारियों से शिकायत की तब जाकर सितंबर में एडमीशन लिया था।



प्रबंधक का यह तर्क
स्कूल के प्रबंधक सचिन ने बताया- बच्चा रोजाना स्कूल आता है, कभी किसी बच्चे को स्कूल से बाहर किया ही नहीं गया है। केवल बच्चे के मां बाप से कहा गया था कि, किताबें खरीद कर ले आइए। आरटीई के तहत स्कूल कोई फीस नहीं लेता है, हम उन्हें पढाते हैं। इनके पैरेंट्स से लगातार कहा जा रहा है कि आप किताबे ले आइए लेकिन ये किताबे नहीं ला रहे हैं। आज बच्चे के पिता आए तो एक टीचर ने किताबों के लिए कहा तो उस टीचर से भद्दे तरीके से बात की।